Home » Children Story » Hindi Moral Story “Yahan Akal Bikti Hai”, “यहां अकल बिकती है” for Kids, Full length Educational Story for Students of Class 5, 6, 7, 8, 9, 10.

Hindi Moral Story “Yahan Akal Bikti Hai”, “यहां अकल बिकती है” for Kids, Full length Educational Story for Students of Class 5, 6, 7, 8, 9, 10.

अकल की दुकान

एक था रौनक। जैसा नाम वैसा रूप। अकल में भी उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता था। एक दिन उसने घर के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा- ‘यहां अकल बिकती है।’ उसका घर बीच बाजार में था।

हर आने-जाने वाला वहां से जरूर गुजरता था। हर कोई बोर्ड देखता, हंसना और आगे बढ़ जाता। रौनक को विश्वास था कि उसकी दुकान एक दिन जरूर चलेगी।

एक दिन एक अमीर महाजन का बेटा वहां से गुजरा। दुकान देखकर उससे रहा नहीं गया।

उसने अंदर जाकर रौनक से पूछा- ‘यहां कैसी अकल मिलती है और उसकी कीमत क्या है? ‘

उसने कहा- ‘यह इस बात पर निर्भर करता है कि तुम इस पर कितना पैसा खर्च कर सकते हो।’

गंपू ने जेब से एक रुपया निकालकर पूछा- ‘इस रुपए के बदले कौन-सी अकल मिलेगी और कितनी?’

‘भई, एक रुपए की अकल से तुम एक लाख रुपया बचा सकते हो।’ गंपू ने एक रुपया दे दिया।

बदले में रौनक ने एक कागज पर लिखकर दिया- ‘जहां दो आदमी लड़-झगड़ रहे हों, वहां खड़े रहना बेवकूफी है।’

गंपू घर पहुंचा और उसने अपने पिता को कागज दिखाया। कंजूस पिता ने कागज पढ़ा तो वह गुस्से से आगबबूला हो गया। गंपू को कोसते हुए वह पहुंचा अकल की दुकान।

कंजूस पिता कागज की पर्ची रौनक के सामने फेंकते हुए चिल्लाए- ‘वह रुपया लौटा दो, जो मेरे बेटे ने तुम्हें दिया था।’

रौनक ने कहा- ‘ठीक है, लौटा देता हूं। लेकिन शर्त यह है कि तुम्हारा बेटा मेरी सलाह पर कभी अमल नहीं करेगा।’

कंजूस महाजन के वादा करने पर रौनक ने रुपया वापस कर दिया।

उस नगर के राजा की दो रानियां थीं। एक दिन राजा अपनी रानियों के साथ जौहरी बाजार से गुजरा। दोनों रानियों को हीरों का एक हार पसंद आ गया।

दोनों ने सोचा- ‘महल पहुंचकर अपनी दासी को भेजकर हार मंगवा लेंगी।’ संयोग से दोनों दा‍सियां एक ही समय पर हार लेने पहुंचीं। बड़ी रानी की दासी बोली- ‘मैं बड़ी रानी की सेवा करती हूं इसलिए हार मैं लेकर जाऊंगी’

दूसरी बोली- ‘पर राजा तो छोटी रानी को ज्यादा प्यार करते हैं, इसलिए हार पर मेरा हक है।’

गंपू उसी दुकान के पास खड़ा था। उसने दासियों को लड़ते हुए देखा। दोनों दासियों ने कहा- ‘वे अपनी रानियों से शिकायत करेंगी।’ जब बिना फैसले के वे दोनों जा रही थीं तब उन्होंने गंपू को देखा।

वे बोलीं- यहां जो कुछ हुआ तुम उसके गवाह रहना।’

दासियों ने रानी से और रानियों ने राजा से शिकायत की। राजा ने दासियों की खबर ली।

दासियों ने कहा- ‘गंपू से पूछ लो वह वहीं पर मौजूद था।’

राजा ने कहा- ‘बुलाओ गंपू को गवाही के लिए, कल ही झगड़े का निपटारा होगा।’

इधर गंपू हैरान, पिता परेशान। ‍आखिर दोनों पहुंचे अकल की दुकान। माफी मांगी और मदद भी।

रौनक ने कहा- ‘मदद तो मैं कर दूं पर अब जो मैं अकल दूंगा, उसकी ‍कीमत है पांच हजार रुपए।

मरता क्या न करता? कंजूस पिता के कुढ़ते हुए दिए पांच हजार। रौनक ने अकल दी कि गवाही के समय गंपू पागलपन का नाटक करें और दासियों के विरुद्ध कुछ न कहे।

अगले दिन गंपू पहुंचा दरबार में। करने लगा पागलों जैसी हरकतें।

राजा ने उसे वापस भेज दिया और कहा- ‘पागल की गवाही पर भरोसा नहीं कर सकते।’

गवाही के अभाव में राजा ने आदेश दिया- ‘दोनों रानी अपनी दासियों को सजा दें, क्योंकि यह पता लगाना बहुत ही मुश्किल है कि झगड़ा किसने शुरू किया।’

बड़ी रानी तो बड़ी खुश हुई। छोटी को बहुत गुस्सा आया।

गंपू को पता चला कि छोटी रानी उससे नाराज हैं तो वह फिर अपनी सुरक्षा के लिए परेशान हो गया। फिर पहुंचा अकल की दुकान।

रौनक ने कहा- ‘इस बार अकल की कीमत दस हजार रुपए।’

पैसे लेकर रौनक बोला- ‘एक ही रास्ता है, तुम वह हार खरीद कर छोटी रानी को उपहार में दे दो।’

गंपू सकते में आया और बोला- ‘अरे ऐसा कैसे हो सकता है? उसकी कीमत तो एक लाख रुपए है।’

रौनक बोला- ‘कहा था ना उस दिन जब तुम पहली बार आए थे कि एक रुपए की अकल से तुम एक लाख रुपए बचा सकते हो।’

इधर गंपू को हार खरीद कर भेंट करना पड़ा, उधर अकल की दुकान चल निकली। कंजूस महाजन सिर पीटकर रह गया।

Related posts:

Short Story "Taking Responsibility" for Children, moral story for kids in English for competition wi...

Children Story

Hindi Moral Story "Jaisi Tumhari Icha", "जैसी तुम्हारी इच्छा” for Kids, Full length Educational Stor...

Children Story

English Inspirational Story "Dead or Alive?" Moral Story for kids and Students.

Short Story

Hindi Moral Story "Dene Wala Jab Bhi Deta Chappar Phad ke ", "देनेवाला जब भी देता छप्पर फाड़ के" for ...

Children Story

English Short, Moral Story “The Washerman’s Donkey" for Kids and Children for Class 5, 6, 7, 8, 9, 1...

Moral Story

Akbar-Birbal Hindi Moral Story "Kiska Naukar Kaun", "किसका नौकर कौन" for Kids, Educational Story for...

Children Story

Short Story "The Boy of The Farmer" for Children, moral story for kids in English for competition wi...

Children Story

English Inspirational Story “Be a Karma Yogi” Moral Story for kids and Students.

Moral Story

English Short, Moral Story “The Mother's Heart" for Kids and Children for Class 5, 6, 7, 8, 9, 10, c...

Moral Story

Hindi Moral Story "Chakravarti Kaun?" "चक्रवर्ती कौन?" Best Motivational Story of "Pushya".

Story

English Short, Moral Story “Trust in God” for Kids and Children for Class 5, 6, 7, 8, 9, 10, competi...

Moral Story

Moral Story "Doubts of Soldiers " for Kids and Children, English Story for Class 5, 6, 7, 8, 9, 10, ...

Children Story

Hindi Moral Story "Ek se Bhale Do", "एक से भले दो” for Kids, Full length Educational Story for Stude...

Children Story

Moral Story "How will You Respond " for Kids and Children, English Story for Class 5, 6, 7, 8, 9, 10...

Children Story

Hindi Moral Story "Vah Sundari Kise Milegi", "वह सुंदरी किसे मिलेगी” for Kids, Full length Education...

Children Story

Hindi Moral Story "Tenaliram ki Chaturaai", "तेनालीराम की चतुराई” for Kids, Full length Educational ...

Children Story

English Short, Moral Story “True Wealth" for Kids and Children for Class 5, 6, 7, 8, 9, 10, competit...

Children Story

English Short, Moral Story “Grandpa’s Table” for Kids and Children for Class 5, 6, 7, 8, 9, 10, comp...

Short Story

English Moral Story "Tiger and heron" for Kids, Full length Educational Story for Students of Class ...

Children Story

Hindi Moral Story "Char Padhe Likhe Moorkh", "चार पढ़े लिखे मूर्ख” for Kids, Full length Educational...

Children Story

About

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*
*

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.